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"देश के गद्दारो को- गोली मारो सालों को"- डायर चीखा!!

"देश के गद्दारो को- गोली मारो सालों को"- डायर चीखा!!  सिख, गुरखा और सिंध के आज्ञाकारी योद्धाओं ने फायर खोल दिया। 1650 गोलियां दागी, 379 लोग मरे, हजार से ऊपर घायल हुए।  बाग की जमीन खून से लाल हो गयी।  ये माकूल सजा थी,  जो रेनिगनल्ड डायर ने तय की थी।  ●● जांच के दौरान, हंटर कमीशन ने डायर से पूछा कि उसने लोगों को आने से रोकने के लिए,पहले ही फौजी पहरा क्यों नहीं लगाया ??  डायर बोला -मैंने तो उन्हें आने दिया। इन सबको मारने की ठान ली थी।’  आखिर इस बाग में जमा सारे लोग धारा 144 का उल्लंघन कर जमा हुए थे। सरकार से प्रदर्शन की अनुमति नही ली थी। मैदान बुक नही कराया था।  देश के खिलाफ पॉलीटिक्स कर रहे थे। राजा के खिलाफ, सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। काले कानून वापस लेने की मांग कर रहे थे। ●● रौलेट एक्ट, अमन और व्यवस्था बचाने के लिए बनाया गया था। भारतीयों के भले के लिए था।  इसकी मुखालफत, अराजकता को आमंत्रण था। बगावत बर्दाश्त नही होगी। गद्दारी बर्दाश्त नही होगी। सबक सिखाया जाएगा।  पुश्तों तक रूह कांप जाए, ऐसा सबक सिखाया जायेगा...

यादव योद्धा: मिथक और इतिहास

यादव योद्धा: मिथक और इतिहास परिचय: "यादव योद्धा" - मिथक और इतिहास "यादव योद्धा" शब्द भारतीय इतिहास और पौराणिक कथाओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह शब्द न केवल प्राचीन योद्धाओं की एक विशिष्ट वंशावली को इंगित करता है, बल्कि यह वीरता, पराक्रम और कर्तव्यनिष्ठा की एक समृद्ध परंपरा को भी दर्शाता है। यादव, जो कि यदु नामक एक महान योद्धा राजा के वंशज माने जाते हैं, उन्होंने भारतीय इतिहास के विभिन्न कालखंडों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, खासकर युद्ध और सैन्य क्षेत्रों में। यह शब्द अपने आप में एक द्वैत प्रकृति रखता है, जो किंवदंती और वास्तविकता, मिथक और इतिहास को आपस में जोड़ता है। एक ओर, यह महाभारत और पुराणों जैसे प्राचीन ग्रंथों में वर्णित महान योद्धाओं की याद दिलाता है, वहीं दूसरी ओर, यह उन ऐतिहासिक समुदायों और व्यक्तियों की पहचान को भी दर्शाता है जिन्होंने विभिन्न युगों में अपनी सैन्य क्षमता और शौर्य का प्रदर्शन किया है। इस विस्तृत रिपोर्ट का उद्देश्य "यादव योद्धा" की अवधारणा का गहन विश्लेषण करना है। यह पड़ताल न केवल भारतीय पौराणिक ग्रंथों में इस शब्द के उ...