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सनातन धर्म में चार  पुरुषार्थ  स्वीकार किए गये हैं जिनमें धर्म प्रमुख है। तीन अन्य पुरुषार्थ ये हैं- अर्थ, काम और मोक्ष। गौतम ऋषि कहते हैं - 'यतो अभ्युदयनिश्रेयस सिद्धिः स धर्म।' (जिस काम के करने से  अभ्युदय  और  निश्रेयस  की सिद्धि हो वह धर्म है। ) मनु  ने मानव धर्म के  दस लक्षण  बताये हैं: धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः। धीर्विद्या सत्यमक्रोधो, दशकं धर्मलक्षणम् ॥ (धृति (धैर्य), क्षमा (दूसरों के द्वारा किये गये अपराध को माफ कर देना, क्षमाशील होना), दम (अपनी वासनाओं पर नियन्त्रण करना), अस्तेय (चोरी न करना), शौच (अन्तरंग और बाह्य शुचिता), इन्द्रिय निग्रहः (इन्द्रियों को वश मे रखना), धी (बुद्धिमत्ता का प्रयोग), विद्या (अधिक से अधिक ज्ञान की पिपासा), सत्य (मन वचन कर्म से सत्य का पालन) और अक्रोध (क्रोध न करना) ; ये दस मानव धर्म के लक्षण हैं।) जो अपने अनुकूल न हो वैसा व्यवहार दूसरे के साथ नहीं करना चाहिये  - यह धर्म की  कसौटी  है। श्रूयतां धर्म सर्वस्वं श्रुत्वा चैव अनुवर्त्यताम्। आत्मनः प्रतिकूलानि, परेष...
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Aaj Ka Panchang and Tithi 21 June: शनिवार का पंचांग, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और राहु काल का समय

    Aaj Ka Panchang and Tithi 21 June 2025  : हिंदू पंचांग के अनुसार (aaj ka panchang) आज शुक्ल पक्ष दशमी तिथि है। इस तिथि पर अतिगंड योग और अश्विनी नक्षत्र बना रहेगा। आज आषाढ़  मास 21 जून दिन शनिवार है। पंचाग के अनुसार आज योगिनी एकादशी, साल का सबसे बड़ा दिन है । आप पूजा के लिए शुभ मुहूर्त  का ध्यान रखें। ब्रह्म मुहूर्त की बात करें तो प्रातः 04:04 बजे से प्रातः 04:44 बजे तक है और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक रहेगा।  दैनिक पूजा के लिए शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखा जाता है, इसलिए इस पंचांग में हम आपको शुभ समय और राहु काल का समय भी बताएंगे ताकि आपको अपनी पूजा का फल मिल सके। ध्यान में रखकर भगवान की पूजा करें। हिंदू पंचांग को वैदिक पंचांग के नाम से जाना जाता है। पंचांग के माध्यम से समय और काल की सटीक गणना की जाती है। पंचांग मुख्य रूप से पाँच भागों से बना होता है। ये पाँच भाग हैं तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण। यहाँ दैनिक पंचांग में हम आपको शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक...

Bhagwat Gita Chapter 18 Verse 11: कर्म फल का त्यागी है, वही त्यागी है ! आखिर ऐसा क्यों है ?

  Bhagwat Gita Chapter 18 Verse 11: आपको बता दें कि इस लेख में भगवान कृष्ण भागवत गीता के श्लोक के माध्यम से अर्जुन को समझाते है की   कर्म फल का त्यागी है, वही त्यागी है ! आखिर ऐसा क्यों है ? न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः , यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते ( अध्याय 18, श्लोक 11 ) न–नहीं; हि-वास्तव में ही; देह-भृता-देहधारी जीवों के लिए; शक्यम्-सम्भव है; त्यक्तुम्-त्यागना; कर्माणि-कर्म; अशेषतः-पूर्णतया; यः-जो; तु-लेकिन; कर्म-फल-कर्मो के फल; त्यागी कर्मफलों को भोगने की इच्छा का त्याग करने वाला; सः वे; त्यागी कर्म फलो का भोगने की इच्छा का त्याग करने वाला; इति-इस प्रकार; अभिधीयते-कहलाता है। अर्थ - देहधारी मनुष्य के द्वारा सम्पूर्ण कर्मों का त्याग करना सम्भव नहीं है। इसलिये जो कर्म फल का त्यागी है, वही त्यागी है। ऐसा कहा जाता है। व्याख्या - देहधारी अर्थात् देह के साथ तादात्म्य रखने वाले मनुष्यों के द्वारा कर्मों का सर्वथा त्याग होना सम्भव नहीं है क्योंकि शरीर प्रकृति का कार्य है और प्रकृति स्वतः क्रियाशील है। अतः शरीर के साथ तादात्म्य (एकता) रखने वाला क्रिय...

Shiv Puran: अधर्मी चंचुला ने क्यों सुना शिव पुराण, आखिर कैसे बनी पार्वती की सखी, पढ़ें रोचक कहानी

  Shiv Puran In Hindi: शिवपुराण की कथा के अनुसार एक बार वाष्कल नामक गांव में बिन्दुग नाम का ब्राह्मण रहता था। वह बड़ा दुरात्मा और महापापी था। यद्यपि उसकी स्त्री बहुत सुंदर थी लेकिन वह कुमार्ग पर ही चलता था। उसकी पत्नी का नाम चंचुला था और वह सदैव धर्म के पालन में लगी रहती थी। इस तरह कुकर्म में लगे हुए उस ब्राह्मण के साथ उसे बहुत वर्ष बीत गए। अपने धर्म के नष्ट होने के डर से कभी भी अपने धर्म से विचलित नहीं हुईं लेकिन उसका पति तो दुराचारी था इसलिए दुराचारी पति के आचरण से प्रभावित होकर वह स्त्री भी अपने ही पति की तरह दूरचारिणी हो गई।  बहुत समय बीत जाने के बाद वह दूषित बुद्धि वाला दुष्ट ब्राह्मण समय के अनुसार मृत्यु को प्राप्त होकर नर्क में चला गया। बहुत दिनों तक नर्क के दुख भोगकर वह पापी एक भयंकर पिशाच हो गया। दूसरी तरफ उस दुराचारी पति की मृत्यु के पश्चात चंचुला बहुत समय तक अपने पुत्रों के साथ अपने घर में ही रहती। एक दिन ईश्वर कृपा से वह अपने भाई बंधुओं के साथ एक तीर्थ क्षेत्र में चली गई। तीर्थ यात्रियों के साथ उसने तीर्थ के जल में स्नान किया और अपने भाइयों के साथ इधर-उधर घूमने लगी...

"देश के गद्दारो को- गोली मारो सालों को"- डायर चीखा!!

"देश के गद्दारो को- गोली मारो सालों को"- डायर चीखा!!  सिख, गुरखा और सिंध के आज्ञाकारी योद्धाओं ने फायर खोल दिया। 1650 गोलियां दागी, 379 लोग मरे, हजार से ऊपर घायल हुए।  बाग की जमीन खून से लाल हो गयी।  ये माकूल सजा थी,  जो रेनिगनल्ड डायर ने तय की थी।  ●● जांच के दौरान, हंटर कमीशन ने डायर से पूछा कि उसने लोगों को आने से रोकने के लिए,पहले ही फौजी पहरा क्यों नहीं लगाया ??  डायर बोला -मैंने तो उन्हें आने दिया। इन सबको मारने की ठान ली थी।’  आखिर इस बाग में जमा सारे लोग धारा 144 का उल्लंघन कर जमा हुए थे। सरकार से प्रदर्शन की अनुमति नही ली थी। मैदान बुक नही कराया था।  देश के खिलाफ पॉलीटिक्स कर रहे थे। राजा के खिलाफ, सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। काले कानून वापस लेने की मांग कर रहे थे। ●● रौलेट एक्ट, अमन और व्यवस्था बचाने के लिए बनाया गया था। भारतीयों के भले के लिए था।  इसकी मुखालफत, अराजकता को आमंत्रण था। बगावत बर्दाश्त नही होगी। गद्दारी बर्दाश्त नही होगी। सबक सिखाया जाएगा।  पुश्तों तक रूह कांप जाए, ऐसा सबक सिखाया जायेगा...

यादव योद्धा: मिथक और इतिहास

यादव योद्धा: मिथक और इतिहास परिचय: "यादव योद्धा" - मिथक और इतिहास "यादव योद्धा" शब्द भारतीय इतिहास और पौराणिक कथाओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह शब्द न केवल प्राचीन योद्धाओं की एक विशिष्ट वंशावली को इंगित करता है, बल्कि यह वीरता, पराक्रम और कर्तव्यनिष्ठा की एक समृद्ध परंपरा को भी दर्शाता है। यादव, जो कि यदु नामक एक महान योद्धा राजा के वंशज माने जाते हैं, उन्होंने भारतीय इतिहास के विभिन्न कालखंडों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, खासकर युद्ध और सैन्य क्षेत्रों में। यह शब्द अपने आप में एक द्वैत प्रकृति रखता है, जो किंवदंती और वास्तविकता, मिथक और इतिहास को आपस में जोड़ता है। एक ओर, यह महाभारत और पुराणों जैसे प्राचीन ग्रंथों में वर्णित महान योद्धाओं की याद दिलाता है, वहीं दूसरी ओर, यह उन ऐतिहासिक समुदायों और व्यक्तियों की पहचान को भी दर्शाता है जिन्होंने विभिन्न युगों में अपनी सैन्य क्षमता और शौर्य का प्रदर्शन किया है। इस विस्तृत रिपोर्ट का उद्देश्य "यादव योद्धा" की अवधारणा का गहन विश्लेषण करना है। यह पड़ताल न केवल भारतीय पौराणिक ग्रंथों में इस शब्द के उ...