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Aaj Ka Panchang and Tithi 21 June: शनिवार का पंचांग, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और राहु काल का समय

    Aaj Ka Panchang and Tithi 21 June 2025  : हिंदू पंचांग के अनुसार (aaj ka panchang) आज शुक्ल पक्ष दशमी तिथि है। इस तिथि पर अतिगंड योग और अश्विनी नक्षत्र बना रहेगा। आज आषाढ़  मास 21 जून दिन शनिवार है। पंचाग के अनुसार आज योगिनी एकादशी, साल का सबसे बड़ा दिन है । आप पूजा के लिए शुभ मुहूर्त  का ध्यान रखें। ब्रह्म मुहूर्त की बात करें तो प्रातः 04:04 बजे से प्रातः 04:44 बजे तक है और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक रहेगा।  दैनिक पूजा के लिए शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखा जाता है, इसलिए इस पंचांग में हम आपको शुभ समय और राहु काल का समय भी बताएंगे ताकि आपको अपनी पूजा का फल मिल सके। ध्यान में रखकर भगवान की पूजा करें। हिंदू पंचांग को वैदिक पंचांग के नाम से जाना जाता है। पंचांग के माध्यम से समय और काल की सटीक गणना की जाती है। पंचांग मुख्य रूप से पाँच भागों से बना होता है। ये पाँच भाग हैं तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण। यहाँ दैनिक पंचांग में हम आपको शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक...

Bhagwat Gita Chapter 18 Verse 11: कर्म फल का त्यागी है, वही त्यागी है ! आखिर ऐसा क्यों है ?

  Bhagwat Gita Chapter 18 Verse 11: आपको बता दें कि इस लेख में भगवान कृष्ण भागवत गीता के श्लोक के माध्यम से अर्जुन को समझाते है की   कर्म फल का त्यागी है, वही त्यागी है ! आखिर ऐसा क्यों है ? न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः , यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते ( अध्याय 18, श्लोक 11 ) न–नहीं; हि-वास्तव में ही; देह-भृता-देहधारी जीवों के लिए; शक्यम्-सम्भव है; त्यक्तुम्-त्यागना; कर्माणि-कर्म; अशेषतः-पूर्णतया; यः-जो; तु-लेकिन; कर्म-फल-कर्मो के फल; त्यागी कर्मफलों को भोगने की इच्छा का त्याग करने वाला; सः वे; त्यागी कर्म फलो का भोगने की इच्छा का त्याग करने वाला; इति-इस प्रकार; अभिधीयते-कहलाता है। अर्थ - देहधारी मनुष्य के द्वारा सम्पूर्ण कर्मों का त्याग करना सम्भव नहीं है। इसलिये जो कर्म फल का त्यागी है, वही त्यागी है। ऐसा कहा जाता है। व्याख्या - देहधारी अर्थात् देह के साथ तादात्म्य रखने वाले मनुष्यों के द्वारा कर्मों का सर्वथा त्याग होना सम्भव नहीं है क्योंकि शरीर प्रकृति का कार्य है और प्रकृति स्वतः क्रियाशील है। अतः शरीर के साथ तादात्म्य (एकता) रखने वाला क्रिय...

Shiv Puran: अधर्मी चंचुला ने क्यों सुना शिव पुराण, आखिर कैसे बनी पार्वती की सखी, पढ़ें रोचक कहानी

  Shiv Puran In Hindi: शिवपुराण की कथा के अनुसार एक बार वाष्कल नामक गांव में बिन्दुग नाम का ब्राह्मण रहता था। वह बड़ा दुरात्मा और महापापी था। यद्यपि उसकी स्त्री बहुत सुंदर थी लेकिन वह कुमार्ग पर ही चलता था। उसकी पत्नी का नाम चंचुला था और वह सदैव धर्म के पालन में लगी रहती थी। इस तरह कुकर्म में लगे हुए उस ब्राह्मण के साथ उसे बहुत वर्ष बीत गए। अपने धर्म के नष्ट होने के डर से कभी भी अपने धर्म से विचलित नहीं हुईं लेकिन उसका पति तो दुराचारी था इसलिए दुराचारी पति के आचरण से प्रभावित होकर वह स्त्री भी अपने ही पति की तरह दूरचारिणी हो गई।  बहुत समय बीत जाने के बाद वह दूषित बुद्धि वाला दुष्ट ब्राह्मण समय के अनुसार मृत्यु को प्राप्त होकर नर्क में चला गया। बहुत दिनों तक नर्क के दुख भोगकर वह पापी एक भयंकर पिशाच हो गया। दूसरी तरफ उस दुराचारी पति की मृत्यु के पश्चात चंचुला बहुत समय तक अपने पुत्रों के साथ अपने घर में ही रहती। एक दिन ईश्वर कृपा से वह अपने भाई बंधुओं के साथ एक तीर्थ क्षेत्र में चली गई। तीर्थ यात्रियों के साथ उसने तीर्थ के जल में स्नान किया और अपने भाइयों के साथ इधर-उधर घूमने लगी...