युगधर्म
मुख्य लेख : युगधर्म
युगधर्म का विस्तार के साथ प्रतिपादन इतिहास पुराणों में बहुत मिलता है (देखिये, मत्स्यपुरण 142-144 अ0; गरूड़पुराण 1.223 अध्यय; वनपर्व 149 अध्याय)। किस काल में युग (चतुर्युग) संबंधी पूर्वोक्त धारण प्रवृत्त हुई थी, इस संबंध में गवेषकों का अनुमान है कि खोष्टीय चौथी शती में यह विवरण अपने पूर्ण रूप में प्रसिद्ध हो गया था। वस्तुत: ईसा पूर्व प्रथम शती में भी यह काल माना जाए तो कोई दोष प्रतीत नहीं होता।
कलियुग का आरम्भ
विद्वानों ने कलियुगारंभ के विषय में विशिष्ट विचार किया है। कुछ के विचार से महाभारत युद्ध से इसका आरंभ होता है, कुछ के अनुसार कृष्ण के निधन से तथा एकाध के मत से द्रौपदी की मृत्युतिथि से कलि का आरंभ माना जा सकता है। यत: महाभारत युद्ध का कोई सर्वसंमत काल निश्चत नहीं है, अत: इस विषय में अंतिम निर्णय कर सकना अभी संभव नहीं है।
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